चंडीगढ़, 29 अक्टूबर। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज Baltej Pannu ने पंजाब के पानी के मुद्दे पर कांग्रेस, भाजपा और पिछली अकाली-भाजपा सरकारों को घेरते हुए आरोप लगाया कि पानी के रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं ने ही पंजाब के हितों के साथ धोखा किया। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान ने पंजाब को नदी के पानी की रॉयल्टी के रूप में मिलने वाले 1.44 लाख करोड़ देने से इनकार कर दिया है, जबकि भाजपा पंजाब के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर खामोश बैठी है।
Baltej Pannu ने कहा कि पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों ने भूजल के लगातार गिरते स्तर की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे कि पंजाब का भूजल तेजी से नीचे जा रहा है, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इस संकट से निपटने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने नहरों, नदियों और बांधों के रखरखाव की अनदेखी की, जिसका खामियाजा आज पंजाब को भुगतना पड़ रहा है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का प्रस्ताव रखे जाने के समय कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें सोने का सिक्का और चांदी की थैली भेंट की थी। उन्होंने दावा किया कि अकाली सरकार के कार्यकाल में भी एसवाईएल नहर को मंजूरी दी गई थी और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल ने हरियाणा विधानसभा में इसके लिए बादल सरकार की सराहना की थी। पन्नू ने यह भी आरोप लगाया कि नहरों की ऊंचाई बढ़ाई गई, ताकि पानी बादल परिवार के निजी फार्महाउस तक पहुंच सके।
मान सरकार में नहरी पानी का इस्तेमाल 88% तक पहुंचने का दावा : Baltej Pannu
बलतेज पन्नू ने कहा कि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नहरी पानी के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने दावा किया कि उस समय पंजाब में केवल 21-22 प्रतिशत नहरी पानी इस्तेमाल हो रहा था, जो अब बढ़कर करीब 88 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने कहा कि नहरों और जल वितरण व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध कराने में मदद मिली है और भूजल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार, नहरी पानी के इस्तेमाल से गांवों में ट्यूबवेलों के जरिए लगातार पानी निकालने की जरूरत कम करने और भूजल स्तर में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
पानी के प्रस्ताव पर कांग्रेस के वॉकआउट और भाजपा की चुप्पी पर सवाल : Baltej Pannu
विधानसभा के हालिया सत्र का उल्लेख करते हुए Baltej Pannu ने आरोप लगाया कि सत्र के अंतिम दिन पंजाब के पानी से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने जानबूझकर वॉकआउट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे पर तो अपनी आवाज उठा रही थी, लेकिन पंजाब के पानी के सवाल पर सदन से बाहर चली गई।
उन्होंने कहा कि सत्र समाप्त होने के कई दिन बाद भी कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (बादल) और अन्य विपक्षी दलों की ओर से इन प्रस्तावों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पन्नू ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पंजाब के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
1994 के समझौते की समीक्षा और यमुना के पानी में हिस्सा देने की मांग
पन्नू ने कहा कि पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्तावों में केंद्र सरकार से 1994 के समझौते की समीक्षा करने और यमुना के पानी में पंजाब को उसका जायज तथा ऐतिहासिक हिस्सा देने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरी हो तो इस विवाद का समाधान जल न्यायाधिकरण या सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि नदी के किनारे स्थित राज्य होने के नाते पंजाब की सीमा में आने वाले रोपड़, हरिके और फिरोजपुर हेडवर्क्स का प्रबंधन तथा रखरखाव पूरी तरह पंजाब सरकार के अधीन होना चाहिए।
बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब के पानी का मुद्दा केवल मौजूदा सरकार या किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में रहने वाले पंजाबी समुदाय को भी इन प्रस्तावों के महत्व को समझना चाहिए।
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