केंद्र राज्य की जायज मांगों को मानने से कर रही है इंकार : Sukhbir Badal
लोंगोंवाल, 20अगस्त: शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष Sukhbir Badal ने आज कहा है कि पंजाब को परेशानी का सामना करना पड़ रहा क्योंकि केंद्र की सरकारों ने नदी जल अधिकार बहाल करने और चंडीगढ़ और पंजाबी भाषा क्षेत्रों को स्थानांतरित करने सहित राज्य की न्यायोचित मांगों को मानने से इंकार कर दिया है।
संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की शहादत की याद में एक आयोजित एक विशाल कांफ्रेंस में उन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अकाली दल अध्यक्ष Sukhbir Badal ने कहा,‘‘ संत जी ने पंजाब के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन केंद्र ने उन्हे धोखा दिया, जिसने उनके साथ-साथ पंजाब के लोगों से किए गए वादों को लागू करने से इंकार दिया।’’ उन्होने कहा कि अभी भी संत लोंगोंवाल को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों द्वारा धोखा दिया जा रहा है, जिन्होने नदी जल पर राज्य के रूख के साथ-साथ चंडीगढ़ को पंजाब में हस्तांतरित करने पर समझौता किया है।
कांग्रेस और आप ने नदी जल और चंडीगढ़ पर अधिकार के मामले में किया समझौता : Sukhbir Badal
अपने शानदार भाषण में सरदार सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Badal) ने अपने दिल की बात कहते हुए कहा,‘‘ अब समय आ गया है कि सिख समुदाय अपने लोगों को पहचाने और भगवंत मान जैसे गददारों की पहचान करे जो डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ बोलने यां यहां तक कि धारा 295-ए के तहत उनके खिलाफ उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के लिए तैयार नही है। उन्होने लोगों से भगवंत मान को मिले भारी जनादेश के बारे में सोचने के लिए कहते हुए कहा,‘‘ उन्होने मुख्यमंत्री बनने के बाद आपको छोड़ दिया और जब आपके खेतों में पानी भर गया यां फिर कुछ और हुआ तो भी वह आपसे मिलने नही आए।’’
राजोआणा और भुल्लर जैसे बंदी सिंहों को किसी और से पहले जेल से रिहा किया जाना चाहिए
लोगों से पंथ को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को खारिज करने का आग्रह करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा,‘‘ आपने कल बंदी सिंह भाई गुरदीप सिंह खेड़ा की बात सुनी। यह बिल्कूल स्पष्ट है कि पहले किसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए- भाई गुरदीप सिख खेड़ा, बलवंत सिंह राजोआणा और दविंदरपाल सिंह भुल्लर जैसे लोग जो 30 साल से जले में बंद है यां जिन्हे केवल एक साल से हिरासत में लिया गया है।’’ यह कहते हुए कि एक साल तक जेल में रहने वाला व्यक्ति पंथ की अगुवाई नही कर सकता, सरदार बादल ने कहा,‘‘ मैं उन परिस्थितियों को दोहराना नही चाहता, जिनके कारण संत लोंगोंवाल की शहादत हुई थी।’’ उन्होने जोर देकर कहा कि खेड़ा ने सिमरनजीत
मान जैसे तथाकथित पंथक नेताओं को भी बेनकाब किया है, जिन्होने पंथ का इस्तेमाल अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया और समुदाय के लिए कुछ नही किया ।
दिल्ली कमेटी को आरएसएस और भाजपा ने अपने कब्जे में ले लिया : Sukhbir Badal
Sukhbir Badal ने कहा कि हर कोई अकाली दल को निशाना बना रहा है, क्योंकि उन्हे पता है कि अगर ऐसा किया गया तो सिख समुदाय कमजोर हो जाएगा। उन्होने कहा,‘‘ इसीलिए अकाली दल को कमजोर करने के बाद शिरोमणी कमेटी को तोड़ दिया गया और हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी बना दी गई।’’ उन्होने कहा कि श्री हजूर साहिब कमेटी को भी सरकार ने अपने कब्जे मं ले लिया और दिल्ली कमेटी को आरएसएस और भाजपा ने अपने कब्जे में ले लिया। उन्होने कहा कि मुस्लिम समुदाय के साथ भी यही हो रहा है, क्योंकि उनकी लीडरशीप कमजोर हो गई है। उन्होने कहा,‘‘ जब अकाली दल मजबूत था तो सिख समुदाय के धार्मिक मामलों में किसी ने हस्तक्षेप नही किया और हमें यह हस्तक्षेप बंद करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।
इस अवसर Sukhbir Badal ने कहा कि संत लोंगोवाल को सबसे उचित श्रद्धांजलि यही होगी कि हमें शिरोमणी अकाली दल को मजबूत करने का संकल्प करना चाहिए। उन्होने ऐतिहासिक सभा को यह भी आश्वासन दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वे शिरोमणी अकाली दल के सिद्धांतों से कभी समझौता नही करेंगें।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं लगातार हो रही हैं
इस अवसर पर एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कैसे राज्य में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन आप सरकार इसके पीछे की साजिश को बेनकाब करने के लिए कुछ भी नही कर रही है। पूर्व शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोंवाल ने इमरजेंसी के दौरान मोर्चे की अगुवाई करने में संत लोंगोंवाल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने लोगों से सत्ता लालच में आए बिना संघवाद , पंथ और पंजाब के लिए खड़े होने के अकाली दल अध्यक्ष के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की है।
इस अवसर पर स. बलविंदर सिंह भूंदड़, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, इकबाल सिंह झूंदा, बाबा टेक सिंह धनौला, विनरजीत सिंह गोल्डी, राजिंदर दीपा, जाहिदा सुलेमान, सतनाम सिंह राही, कुलवंत सिंह केतु, सरबजीत सिंह झिंझर, गुरप्रीत सिंह राजुखन्ना ने भी संबोधित किया।
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