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Police War Room : कैसे गैंगस्टरों की साजिशों को पहले ही कर देता है नाकाम

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Police War Room - How gangsters' plots are foiled in advance
Police War Room - How gangsters' plots are foiled in advance

Police War Room में कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल मैपिंग और इंटेलिजेंस इनपुट मुख्य हथियार

चंडीगढ़, 10 मार्च (The State Headlines Team)। पंजाब में बढ़ते संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क से निपटने के लिए पंजाब पुलिस ने तकनीक और खुफिया जानकारी का मजबूत तंत्र विकसित किया है। इसका केंद्र है पंजाब पुलिस का हाई-टेक Police War Room, जहां कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल मैपिंग और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर अपराधियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाती है।

राज्य भर के जिलों से मिलने वाली फील्ड जानकारी और लगातार आने वाली कॉल्स के बीच यहां काम करने वाले अधिकारी संगठित अपराध के खिलाफ एक शांत लेकिन लगातार चलने वाली लड़ाई लड़ते हैं। इस वार रूम का मुख्य उद्देश्य गैंगस्टरों द्वारा किसी वारदात को अंजाम देने से पहले ही उनकी योजना को विफल करना है।

Police War Room: तकनीक और इंटेलिजेंस का संयोजन

पिछले कुछ वर्षों में पंजाब पुलिस ने इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग को मजबूत किया है। तकनीक और खुफिया जानकारी को जोड़कर पुलिस अब ऐसे गैंगस्टर नेटवर्क को भी ट्रैक कर रही है जो दूसरे राज्यों या विदेशों से संचालित हो रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार राज्य में सक्रिय कई बड़े गिरोह अब डिसेंट्रलाइज्ड सेल सिस्टम पर काम करते हैं। विदेशों में बैठे हैंडलर निर्देश देते हैं, जबकि स्थानीय सहयोगी पंजाब में अपराध को अंजाम देते हैं।

72,000 आवाज़ नमूनों वाला AI सिस्टम

पंजाब पुलिस ने अपराधियों और संदिग्धों के 72,000 से अधिक आवाज़ नमूने पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (PAIS) में शामिल किए हैं। यह एक मोबाइल आधारित एप्लिकेशन है जो फिरौती और धमकी भरी कॉल करने वालों की पहचान करने में मदद करता है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक जबरन वसूली के मामलों में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है, क्योंकि कई कॉल इंटरनेट कॉलिंग या एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए विदेशी नंबरों से की जाती हैं।

डिजिटल सबूत से अपराध से पहले कार्रवाई

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, हर कॉल और हर डिजिटल संदेश कोई न कोई सबूत छोड़ता है। पुलिस इन डिजिटल कड़ियों को जोड़कर अपराध होने से पहले ही कार्रवाई करती है।

हाल ही में पुलिस ने विदेश में बैठे एक गैंगस्टर से जुड़े दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया, जिन्हें पंजाब में टारगेट किलिंग की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस ने खुफिया सूचना और डिजिटल निगरानी के आधार पर उन्हें वारदात से पहले ही पकड़ लिया और उनके पास से पिस्तौल व कारतूस बरामद किए।

Police War Room : एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की अहम भूमिका

संगठित अपराध से निपटने के लिए पंजाब पुलिस ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को भी मजबूत किया है। यह यूनिट राज्यभर में अधिकार क्षेत्र के साथ काम करती है और इसका अपना समर्पित पुलिस स्टेशन तथा विशेष बल है।

इस यूनिट के विश्लेषक कॉल डेटा रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और यात्रा पैटर्न का विश्लेषण कर गैंगस्टरों के नेटवर्क, फंडिंग और सहयोगियों की पहचान करते हैं।

विदेशों में बैठे 60 गैंगस्टर पुलिस के निशाने पर

पंजाब पुलिस के अनुमान के अनुसार पंजाब से जुड़े लगभग 60 गैंगस्टर इस समय विदेशों, खासकर कनाडा और अमेरिका में बैठे हैं और वहीं से आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।

ऐसे नेटवर्क पर नजर रखने के लिए पंजाब पुलिस केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। इसके लिए फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल भी स्थापित किए गए हैं, जो फरार अपराधियों की निगरानी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

मुखबिर नेटवर्क और नागरिकों की भूमिका

तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक पुलिसिंग भी अहम बनी हुई है। पुलिस का मुखबिर नेटवर्क और गुप्त सूचना देने वाले स्रोत संभावित अपराधों के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं।

इसके अलावा पंजाब पुलिस ने एक विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की है, जिसके जरिए नागरिक गुप्त रूप से गैंगस्टर गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं। यह जानकारी सीधे एंटी-गैंगस्टर यूनिट तक पहुंचती है।

अपराध से पहले ही कार्रवाई पर फोकस

खुफिया जानकारी और डिजिटल विश्लेषण के इस संयोजन ने पंजाब में पुलिसिंग का तरीका बदल दिया है। अब पुलिस का लक्ष्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध से पहले ही शूटरों की पहचान कर साजिश को नाकाम करना है।

राज्य के अपराध निगरानी केंद्रों में काम कर रहे अधिकारियों का मकसद स्पष्ट है—गैंगस्टर नेटवर्क के अगले कदम का पहले ही अनुमान लगाकर उसे विफल करना।

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Rajesh Sachdeva

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