2027 चुनाव से पहले अकाली दल को झटका
समाना/चंडीगढ़, 16 मई 2026: पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री Surjit Singh Rakhra शनिवार को औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने समाना में आयोजित जनसभा के दौरान उनका पार्टी में स्वागत किया। रखड़ा के साथ उनके परिवार के सदस्य और कई समर्थक भी ‘आप’ में शामिल हुए।
2027 पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले इसे शिरोमणि अकाली दल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि 16 मई का दिन पंजाब की राजनीति में अहम रहेगा क्योंकि एक अनुभवी और सम्मानित सार्वजनिक जीवन वाली शख्सियत ‘आप’ परिवार का हिस्सा बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि Surjit Singh Rakhra ने कई बार शिरोमणि अकाली दल को भीतर से सुधारने की कोशिश की, लेकिन पार्टी अपनी मूल दिशा से भटक गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बेअदबी के मुद्दों और जनविरोधी राजनीति के कारण अकाली दल जनता का भरोसा खो चुका है।
अकाली दल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा, “कभी पंजाब पर 25 साल राज करने का दावा करने वालों की पार्टी में आज 25 लोग भी नहीं बचे।” उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि संगठनात्मक ढांचा खड़ा करना भी मुश्किल हो गया है।
Surjit Singh Rakhra सरकार की नीतियों से प्रभावित
इस अवसर पर Surjit Singh Rakhra ने कहा कि उनका ‘आप’ में शामिल होने का फैसला मुख्य रूप से बेअदबी के खिलाफ बनाए गए सख्त कानून और भगवंत मान सरकार की नीतियों से प्रभावित है। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बेअदबी विरोधी कानून की मांग से जुड़े आंदोलनों के संपर्क में रहे और मान सरकार द्वारा कानून लागू किए जाने के बाद उन्होंने अपना वादा निभाया।
रखड़ा ने कहा कि पिछली सरकारें राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण प्रभावी कानून बनाने में सफल नहीं हो सकीं, जबकि मौजूदा सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कानून लागू होने के बाद उन्हें ‘आप’ में शामिल होने में कोई झिझक नहीं रही।
इसके अलावा, उन्होंने पंजाब सरकार के नहरी पानी के विस्तार और भूजल संरक्षण प्रयासों की भी सराहना की। रखड़ा के अनुसार, इन पहलों से पंजाब को भविष्य में जल संकट और रेगिस्तान जैसी स्थिति से बचाने में मदद मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है और विभिन्न दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
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