मौत की डोर बेचने वालों पर क्यों मेहरबान है Haryana Government ?
चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध का ढोंग बेनकाब, भाजपा सरकार कार्रवाई में फेल: अनुराग ढांडा
चंडीगढ़, 14 फरवरी। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने Haryana Government और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चाइनीज मांझे पर ‘पूर्ण प्रतिबंध’ की अधिसूचना महज़ एक कागजी धोखा है। सरकार ने फरवरी 2026 में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के जरिए प्रतिबंध का ढोल तो पीट दिया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ‘मौत की डोर’ आज भी खुलेआम बिक रही है और हरियाणा की सड़कों पर निर्दोष लोगों की जान ले रही है। पिछले कुछ महीनों में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए और कई मौतें हुईं और यह सिर्फ वे मामले हैं जो दर्ज हो पाए।
अनुराग ढांडा ने कहा कि 2017 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने देशभर में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन Haryana Government उसे लागू कराने में पूरी तरह फेल साबित हुई है।
बाजारों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है, सप्लाई चेन खुली है, पुलिस की नाक के नीचे यह कारोबार जारी है, फिर भी सरकार न तो सख्त छापेमारी करती है, न ही कोई एक्शन न लेने पर बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई करती है, न किसी अधिकारी की जवाबदेही तय करती है।
Haryana Government सिर्फ प्रेस रिलीज जारी करने में सक्रिय
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार सिर्फ प्रेस रिलीज जारी करने में सक्रिय है, ज़मीनी कार्रवाई में नहीं। हादसों में जान गंवाने वालों के परिवारों को अब तक कोई ठोस मुआवजा नहीं मिला। घायलों के इलाज की जिम्मेदारी सरकार ने नहीं ली। किसी भी बड़े सप्लायर या नेटवर्क पर हत्या जैसे गंभीर प्रावधानों के तहत केस दर्ज नहीं किए गए। सवाल यह है कि आखिर किसे बचाया जा रहा है?
अनुराग ढांडा ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर हत्या की श्रेणी को लेकर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए है, क्या बीजेपी सरकार की नजर में हरियाणा की जनता की जान की कोई कीमत नहीं? क्या सरकार और कितनी लाशों का इंतजार कर रही है?
अनुराग ढांडा ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की लापरवाही अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुकी है। यह सिर्फ मांझा नहीं काट रहा, बल्कि सरकार की नीयत और नाकामी को भी बेनकाब कर रहा है। हरियाणा की जनता जवाब मांग रही है। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।