पटियाला, 2 नवंबर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को Patiala जिले के घनौर विधानसभा क्षेत्र के गांव मंडोली में 432.65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दो अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र जनता को समर्पित किए। इन परियोजनाओं से पटियाला और फतेहगढ़ साहिब क्षेत्र के 316 गांवों में रहने वाले करीब 4.50 लाख लोगों को साफ नहरी पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के तहत लगभग 75 हजार घरों तक 752 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से उन गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जहां भूजल में फ्लोराइड और भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है। नहरी पानी को शुद्ध करके घरों तक पहुंचाने से लोगों को दूषित भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी गांवों के लोगों को पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को विशेष परियोजनाएं शुरू करनी पड़ रही हैं। यह काम दशकों पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन पिछली सरकारों ने गांवों की जरूरतों की अनदेखी की। उनकी सरकार ने इस लंबे समय से लंबित समस्या को हल करने की दिशा में कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि मंडोली और पाबरी में दो जल शोधन संयंत्र स्थापित किए गए हैं। मंडोली संयंत्र पर 266.20 करोड़ रुपये और पाबरी संयंत्र पर 166.46 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से पांच विधानसभा क्षेत्रों के 316 गांवों को लाभ पहुंचाने की योजना है।
भूजल पर निर्भरता कम करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में भूजल का लगातार दोहन गंभीर चिंता का विषय है। राज्य में भूजल का दोहन प्राकृतिक रूप से दोबारा भरने की क्षमता से काफी अधिक हो चुका है। पंजाब में भूजल दोहन का स्तर 156.36 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पटियाला जिले की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां भूजल दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण की तुलना में लगभग 208 प्रतिशत बताया गया है।
उन्होंने कहा कि घनौर, राजपुरा, सनौर, Patiala ग्रामीण और शंभू कलां क्षेत्र के गांवों में भूजल की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर फ्लोराइड, एल्युमिनियम, सीसा, सल्फेट, आर्सेनिक और यूरेनियम जैसे तत्व निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक पाए गए हैं। ऐसे में नहरी पानी आधारित परियोजनाएं लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ भूजल संरक्षण में भी मदद करेंगी।
पानी की गुणवत्ता पर रोजाना होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों संयंत्रों में पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। पानी को शुद्ध करने से पहले और बाद में उसके नमूनों की जांच की जाएगी। प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट हर महीने राज्य स्तरीय जल परीक्षण प्रयोगशाला को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जल शोधन संयंत्रों और पानी की टंकियों में आधुनिक निगरानी व्यवस्था (SCADA) लगाई गई है। इससे पानी की आपूर्ति, भंडारण और गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
परियोजना के तहत 752 किलोमीटर लंबी डीआई पाइपलाइन बिछाई गई है, जबकि गांवों में 1,216 किलोमीटर मौजूदा पाइपलाइन को भी अपग्रेड किया गया है। पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए 322 भंडारण टैंकों का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी को अगले 10 वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी गई है।
Patiala : लोगों ने कहा, अब साफ पानी की चिंता से मिलेगी राहत
पटियाला जिले के निवासी गुरप्रीत सिंह ने कहा कि पहले भूजल की गुणवत्ता खराब होने के कारण परिवारों को पीने के पानी को लेकर चिंता रहती थी। अब नहरी पानी को शुद्ध करके घरों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है।
सनौर की निवासी हरप्रीत कौर ने कहा कि साफ पानी मिलने से परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी। उन्होंने कहा कि सैकड़ों गांवों में इस स्तर पर पेयजल व्यवस्था तैयार करना लोगों के लिए बड़ी राहत है।
चार बड़े शहरों में भी नहरी पानी पहुंचाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला शहरों में भी नहरी पानी आधारित पेयजल परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं से करीब 78 लाख शहरी निवासियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। इनके लिए कुल 1,410 एमएलडी जल शोधन क्षमता विकसित करने और 500 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बिछाने की योजना है।
इन परियोजनाओं के तहत 224 नए जल भंडारण केंद्र, भूमिगत टैंक और पंपिंग स्टेशन भी विकसित किए जाएंगे। इससे शहरों की भूजल पर निर्भरता कम करने और पेयजल आपूर्ति को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2027 तक सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब के 23 जिलों में फिलहाल 152 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,243.7 एमएलडी है। दिसंबर 2027 तक करीब 58 नए प्लांट जोड़कर यह क्षमता लगभग 2,676 एमएलडी करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें अमृतसर और जीरकपुर में 50-50 एमएलडी क्षमता वाले दो बड़े प्लांट भी शामिल हैं।
इसके अलावा Patiala जिले के विभिन्न शहरी निकायों में कुल 114.24 किलोमीटर सीवरेज और नालों की गाद निकालने का काम किए जाने की जानकारी दी गई।
यह भी पढ़े :- कांग्रेस-अकाली दल-भाजपा पर बरसे Bhagwant Mann, बोले- झंडे अलग, मंसूबे एक