चंडीगढ़, 1 सितंबर (ध्रुव)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य में Stubble Burning की घटनाओं को और कम करने के लिए व्यापक सूचना एवं जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार के लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप 2023 से 2025 के बीच Stubble Burning की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
पराली प्रबंधन को लेकर हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर तक जागरूकता अभियान को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों को इस अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
Stubble Burning : 2023 में 36,663 से घटकर 2025 में 5,114 हुई घटनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में पंजाब में पराली जलाने की 36,663 घटनाएं दर्ज की गई थीं। यह संख्या 2024 में घटकर 10,909 और 2025 में केवल 5,114 रह गई। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और कमी लाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई है और इससे करीब 18.81 मिलियन टन पराली पैदा होने का अनुमान है।
गांव और ब्लॉक स्तर पर चलाया जाएगा अभियान
भगवंत मान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पराली जलाने के नुकसान और इसके व्यावहारिक विकल्पों के बारे में गांव और ब्लॉक स्तर पर जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित करने के लिए एनजीओ और समाजसेवियों को अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए। इसके साथ ही मशीनरी प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें, शपथ समारोह और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
Stubble Burning : सोशल मीडिया के जरिए भी होगा व्यापक प्रचार
मुख्यमंत्री ने जमीनी अभियान के साथ-साथ डिजिटल और मल्टीमीडिया माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल के निर्देश दिए। उन्होंने रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एसएमएस और आउटडोर मीडिया के जरिए जागरूकता फैलाने को कहा।
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी बड़े स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत बताई, ताकि किसानों तक पराली जलाने के दुष्प्रभाव और इसके उपलब्ध विकल्पों की जानकारी पहुंचाई जा सके।
बेहतर काम करने वाले किसानों और पंचायतों को किया जाएगा सम्मानित
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रगतिशील किसानों, बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों, पैक्स और अन्य संबंधित संस्थाओं को उनके योगदान के लिए सम्मानित करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि ऐसे किसानों और ग्रामीण संस्थाओं को प्रोत्साहित करने से दूसरे लोग भी पराली प्रबंधन की बेहतर तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे और यह अभियान सामूहिक आंदोलन का रूप ले सकेगा।
खेत में और खेत से बाहर पराली प्रबंधन पर जोर
मुख्यमंत्री ने इन-सीटू और एक्स-सीटू पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने के बजाय इसके प्रबंधन के व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी विभागों, जिलों और संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि पराली प्रबंधन की रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के.के. यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, सचिव कृषि विभाग अर्शदीप सिंह थिंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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