खुशकिस्मती से हमने पहले ही स्वास्थ्य कार्ड (Cashless Treatment in Punjab) बनवा : जगजीत सिंह
चंडीगढ़, 24 अप्रैल (ध्रुव)। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ अब आम लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है, खासकर न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी के मामलों में जहां हर मिनट बेहद अहम होता है। इस योजना के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज (Cashless Treatment in Punjab) की सुविधा मिल रही है, जिससे आर्थिक तंगी अब इलाज में बाधा नहीं बन रही।
होशियारपुर का एक हालिया मामला इस बदलाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है। संदीप सिंह, जिन्हें तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक हुआ था, को एम्स बठिंडा में भर्ती कराया गया, जहां उनका 32,300 रुपये का इलाज पूरी तरह योजना के तहत कवर किया गया। उनके पिता जगजीत सिंह ने कहा, “खुशकिस्मती से हमने पहले ही स्वास्थ्य कार्ड बनवा लिया था। इससे इलाज का पूरा खर्च कवर हो गया।” यह मामला दर्शाता है कि भगवंत मान सरकार की जनपक्षीय नीतियां किस तरह मेडिकल इमरजेंसी के दौरान परिवारों को अप्रत्याशित आर्थिक बोझ से बचा रही हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के मजबूत स्वास्थ्य तंत्र के सपने से प्रेरित होकर, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत अब तक 40 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हो चुका है। यह योजना सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में 10 लाख रुपये तक का रहित इलाज इलाज प्रदान करती है, जिसमें स्ट्रोक, सिर की चोट, दौरे और रीढ़ की हड्डी की चोट जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियां शामिल हैं। उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा किसी विशेष वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि पंजाब के हर नागरिक का अधिकार बने।
ढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी के मामले बढ़ रहे
पंजाब भर के चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ सड़क हादसों और बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे हालात में भगवंत मान सरकार की नीतियों के तहत मिल रही त्वरित चिकित्सा सहायता बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रही है, खासकर स्ट्रोक के मामलों में, जहां एक-एक मिनट जीवन और मृत्यु तय करता है।
राजिंदरा अस्पताल के डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि भगवंत मान सरकार का नकद रहित स्वास्थ्य मॉडल इमरजेंसी में कीमती समय बचा रहा है। उन्होंने कहा, “कई मामलों में सर्जरी तुरंत शुरू कर दी जाती है, जबकि कागजी कार्रवाई बाद में पूरी की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पैसों की व्यवस्था करने में समय बर्बाद न हो।” यह बदलाव एक ऐसे प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है जो प्रक्रियागत देरी के बजाय मानव जीवन को प्राथमिकता देता है।
लुधियाना के डॉक्टरों ने भी मरीजों के व्यवहार में बदलाव की पुष्टि की है, जिसे वे सरकारी स्वास्थ्य गारंटी से पैदा हुए भरोसे का नतीजा मानते हैं। डॉ. हरमन सोबती, वरिष्ठ कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन और स्पाइन सर्जन, ने कहा, “अचानक कमजोरी, चेहरे का ढीला पड़ जाना या बोलने में दिक्कत जैसे शुरुआती लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। जल्दी अस्पताल पहुंचने से इलाज के सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।” इलाज पर खर्च की झिझक कम होने के कारण मरीज समय पर उपचार के लिए आगे आ रहे हैं, जो भगवंत मान सरकार की नीति का सीधा प्रभाव है।
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