Economy News: RBI के लाभांश को राज्यों के साथ भी बांटा जाए हिस्सा
चंडीगढ़, 22 मई 2026 (ध्रुव)। पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा केंद्र सरकार को दिए गए लगभग 2.87 लाख करोड़ के लाभांश पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस असाधारण वित्तीय लाभ का हिस्सा राज्यों के साथ भी साझा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सहकारी संघवाद की भावना के तहत राज्यों को भी ऐसे अप्रत्याशित राजस्व लाभ से फायदा मिलना चाहिए।
चीमा ने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार यह राशि Reserve Bank of India (RBI) द्वारा केंद्र सरकार को दिए गए सबसे बड़े लाभांश ट्रांसफर में से एक मानी जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे को केवल वित्तीय लाभ तक सीमित नहीं बताया, बल्कि केंद्रीय बैंक की दीर्घकालिक मजबूती और संस्थागत स्वतंत्रता से भी जोड़ा।
राज्यों को भी मिलना चाहिए लाभ: चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि यदि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और सप्लाई से जुड़े दबावों का असर केंद्र सरकार पर पड़ रहा है, तो राज्य भी उन्हीं परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए ऐसे असाधारण वित्तीय लाभ को सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और वित्तीय संतुलन के सिद्धांतों के आधार पर राज्यों के साथ साझा करने पर विचार होना चाहिए।
RBI की वित्तीय मजबूती कमजोर न हो: चिंता
हरपाल चीमा ने कहा कि राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन यह केंद्रीय बैंक की वित्तीय मजबूती की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय RBI आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उनके मुताबिक, केंद्रीय बैंक के रिजर्व में अत्यधिक कमी दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और वित्तीय लचीलापन प्रभावित कर सकती है।
आरबीआई की स्वायत्तता बनाए रखने की अपील
चीमा ने RBI नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक की संस्थागत स्वतंत्रता, विश्वसनीयता और नीति निर्धारण की क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत केंद्रीय बैंक आवश्यक है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI को पर्याप्त वित्तीय बफर बनाए रखना चाहिए।
RBI लाभांश क्यों महत्वपूर्ण है ?
RBI हर साल अपनी आय और रिजर्व प्रबंधन के आधार पर सरकार को अधिशेष (Surplus) ट्रांसफर करता है। यह राशि सरकार के राजस्व को प्रभावित कर सकती है और सार्वजनिक खर्च, घाटे के प्रबंधन तथा वित्तीय योजनाओं पर असर डाल सकती है। हालांकि, इस लाभांश के आकार और उपयोग को लेकर समय-समय पर आर्थिक बहस होती रही है।
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