Sadak Surakhya Force : एआई और सैटेलाइट से पंजाब बनेगा रोड सेफ्टी हब
Sadak Surakhya Force ने तैयार किया 3डी पुलिसिंग मॉडल
मोहाली, 13 अगस्त (ध्रुव)। पंजाब में सड़क सुरक्षा को नई तकनीक से जोड़ते हुए Sadak Surakhya Force (SSF) ने राज्य को भारत का रोड सेफ्टी हब बनाने की दिशा में बड़ा रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जियोस्पेशियल डेटा और रियल-टाइम एनालिटिक्स को पुलिसिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। पंजाब पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल देश में अपनी तरह का पहला मॉडल होगा।
पंजाब पुलिस के मुताबिक फरवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच Sadak Surakhya Force ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुंचकर 47,386 लोगों की मदद की। इनमें 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। एसएसएफ को विशेष रूप से हाईवे और प्रमुख सड़कों पर तत्काल प्रतिक्रिया और दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए तैनात किया गया है।
हादसे वाली जगह पर 6 से 10 मिनट में पहुंचने का लक्ष्य
Sadak Surakhya Force के पास 144 हाईटेक वाहन और 1,600 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। इनमें करीब 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं। बल को करीब 4,100 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और प्रमुख जिला सड़कों पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है।
एसएसएफ का पूरा मॉडल ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसका लक्ष्य दुर्घटना के बाद छह से आठ मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर पीड़ित को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है। एसएसएफ वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर, ई-चालान मशीन, डैश कैम और फर्स्ट एड किट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
Sadak Surakhya Force : सड़क हादसों में मौतों में 45-48% कमी का दावा
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, एसएसएफ की निगरानी वाले चिन्हित मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 45 से 48 प्रतिशत तक कमी आई है। इन मार्गों पर हादसों में मौतों की संख्या 2023 में 1,955 थी, जो 2024 में घटकर 1,016 रह गई।
डीजीपी ने कहा कि एसएसएफ का उद्देश्य केवल हादसों पर प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि तकनीक और डेटा की मदद से दुर्घटनाओं को रोकना भी है। इसके लिए ‘विजन एसएसएफ-2047’ के तहत सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की योजना है।
3डी पुलिसिंग में एआई और ड्रोन की होगी भूमिका
प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट डेटा और एआई आधारित पूर्वानुमान प्रणाली को जोड़ा जाएगा। इससे सड़क की स्थिति, संभावित दुर्घटना वाले स्थानों, ट्रैफिक जाम और अन्य जोखिमों की वास्तविक समय में निगरानी और पहचान करने में मदद मिलेगी।
एसएसएफ फेज-II में अपना कवरेज मौजूदा 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सैटेलाइट कम्युनिकेशन और जियोस्पेशियल डेटा के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
Road Safety Force : एएनपीआर और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से तेज होगी कार्रवाई
एसएसएफ परियोजना में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) तकनीकी आधार के तौर पर काम कर रहा है। इसमें एआई, आईओटी सेंसर और रियल-टाइम एनालिटिक्स को शामिल किया गया है। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और मोबाइल इंटरसेप्टर के जरिए ट्रैफिक निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत किया जा रहा है।
पंजाब पुलिस के अनुसार, इन तकनीकों के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया का औसत समय सात मिनट से कम किया गया है। ‘रोड सेफ्टी पंजाब’ विजन के तहत 7E फ्रेमवर्क—Engineering, Enforcement, Education, Electronics, Emergency Care, Engagement और Evaluation—को अपनाया जा रहा है।
Road Safety Force : रिसर्च संस्थानों से भी सहयोग
पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर (PRSTRC) को सड़क सुरक्षा से जुड़े रिसर्च, प्रशिक्षण और परामर्श का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। इसके लिए IIT, NIT, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी, GNDEC लुधियाना और GNDU अमृतसर जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है।
एसडीजीपी ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी अमरदीप सिंह राय ने कहा कि एसएसएफ के जवानों को सामान्य कानून-व्यवस्था ड्यूटी से अलग सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि एसएसएफ का मुख्य प्रदर्शन मानक लोगों की जान बचाना और दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।
पंजाब पुलिस का लक्ष्य आने वाले वर्षों में तकनीक आधारित निगरानी, तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया और वैज्ञानिक सड़क सुरक्षा प्रबंधन के जरिए पंजाब को देश में रोड सेफ्टी का प्रमुख मॉडल बनाना है।
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