Takht Sri Hazur Sahib पर सुखबीर बादल पर हमले की कोशिश की बलतेज पन्नू ने की निंदा
चंडीगढ़, 13 अगस्त (ध्रुव)।आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने तख्त Takht Sri Hazur Sahib में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर हमले की कोशिश की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थान, खासकर गुरुद्वारा साहिब (Takht Sri Hazur Sahib) में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और धार्मिक स्थलों की मर्यादा एवं गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखबीर बादल पर हमले की कोशिश की निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और गुरुद्वारा साहिब में इस तरह की घटना स्वीकार्य नहीं है।
हालांकि, इस घटना के साथ ही पन्नू ने 2015 की बेअदबी की घटनाओं को लेकर अकाली दल के प्रति सिख समुदाय में मौजूद भावनाओं और शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अकाली दल को इन भावनाओं को समझने की जरूरत है।
पन्नू ने आरोप लगाया कि अकाली दल ने पंथ के नाम पर वोट मांगकर कई बार सरकार बनाई, लेकिन उसके शासनकाल के दौरान वर्ष 2015 में पंजाब के कई स्थानों पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद सिख समुदाय में गहरा रोष पैदा हुआ था।
शांतमई प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया
आप नेता ने 2015 की बेअदबी की घटनाओं के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब लोग बेअदबी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे, तब उन पर पानी की बौछारें की गईं और गोलियां भी चलाई गईं। पन्नू के मुताबिक, इन घटनाओं में दो सिखों की जान चली गई थी।
उन्होंने कहा कि उन घटनाओं का दर्द और गुस्सा आज भी सिख समुदाय के लोगों के मन में मौजूद है। इसलिए अकाली दल को भी उस समय की घटनाओं से जुड़ी भावनाओं और शिकायतों को समझना चाहिए।
बलतेज पन्नू ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर हमला करने की कोशिश को सही नहीं ठहराया जा सकता। धार्मिक स्थानों पर अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि गुरुद्वारा साहिब की गरिमा का सम्मान होना चाहिए और किसी भी धार्मिक स्थान को हिंसा का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब जैसी पवित्र धार्मिक संस्था में हुई घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सभी पक्षों को धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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