पंजाब सरकार ने राज्य में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्कूल खोलने पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को यह अधिकार दिया है कि वे अपने-अपने इलाके की स्थिति का आकलन कर यह तय करें कि स्कूल कब और कैसे खोले जाएं। फिलहाल कई जिलों में बाढ़ का असर जारी है, जिस वजह से स्कूलों को बंद रखा गया था।
राज्य सरकार का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कई जगह स्कूल भवनों में पानी भरने, सड़कों के टूटने और यातायात बाधित होने के कारण बच्चों का स्कूल आना-जाना मुश्किल है। इस कारण फिलहाल एक समान आदेश जारी करने के बजाय जिला स्तर पर निर्णय लेने की छूट दी गई है।
जिन जिलों में पानी की स्थिति सामान्य हो चुकी है, वहां के डिप्टी कमिश्नर स्कूल खोलने का आदेश जारी कर सकते हैं। वहीं, जिन इलाकों में अभी भी खतरा बना हुआ है, वहां स्कूल बंद रहेंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन और वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
इस फैसले से साफ है कि राज्य सरकार बाढ़ के हालात को गंभीरता से ले रही है और बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करना चाहती। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर फैसला लेने की छूट मिलने से हालात के मुताबिक लचीलापन मिलेगा और अनावश्यक जोखिम से बचा जा सकेगा।
अभी तक पंजाब के कई जिलों में नदियों का पानी बढ़ने से स्कूलों को बंद करना पड़ा था। अब हालात पर नज़र रखते हुए धीरे-धीरे स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
