चंडीगढ़, 11 अगस्त (ध्रुव)। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि श्री Guru Ravidas Ji महाराज की बाणी समानता, मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सार्वभौमिक भाईचारे का ऐसा शाश्वत संदेश देती है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति से ऊपर उठकर प्रत्येक मनुष्य की समानता और गरिमा पर जोर दिया।
चीमा मंगलवार को एमिटी यूनिवर्सिटी, मोहाली में ‘श्री Guru Ravidas Ji महाराज की बाणी एवं सामाजिक समानता’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं भेदभाव को समाप्त कर ऐसे समाज के निर्माण की प्रेरणा देती हैं, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।
25 करोड़ की लागत से बनेगा Guru Ravidas Ji बाणी अध्ययन केंद्र
वित्त मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा डेरा बल्लां के फरीदपुरा नौगज़ा में श्री गुरु रविदास जी बाणी अध्ययन केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक केंद्र के निर्माण पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि भूमि की खरीद पर लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र श्री गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं के शोध, अध्ययन और प्रचार-प्रसार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में काम करेगा।
Guru Ravidas Ji : 650 साल पहले समानता और गैर-भेदभाव का संदेश
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गैर-भेदभाव जैसे सिद्धांत, जिन्हें पश्चिमी देशों में बाद में संस्थागत मान्यता मिली, श्री गुरु रविदास जी महाराज और अन्य महान संतों की शिक्षाओं में लगभग 650 वर्ष पहले ही दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी की समतावादी सोच अपने समय से बहुत आगे थी और आज भी मानव गरिमा तथा समानता पर आधारित समाज के निर्माण का रास्ता दिखाती है।
‘बेगमपुरा’ में दिखी आदर्श समाज की कल्पना
चीमा ने गुरु रविदास जी की ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ऐसी आदर्श सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है, जो भेदभाव, शोषण और असमानता से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि गुरु जी की बाणी में निहित सिद्धांत न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण में मार्गदर्शक बन सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों और विद्वानों से गुरु रविदास जी की बाणी का गहन अध्ययन करने तथा उसकी समकालीन प्रासंगिकता को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को आध्यात्मिक व्यक्तित्वों और समाज सुधारकों की शिक्षाओं पर शोध, संवाद और बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देना चाहिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी उठाया सवाल
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए चीमा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता में मौजूद कुछ राजनीतिक ताकतों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने इसे गुरु रविदास जी द्वारा दिए गए समानता, स्वतंत्रता और मानव गरिमा के संदेश के विपरीत बताया।
उन्होंने भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों, जातियों और समुदायों के बावजूद एकता और भाईचारे की भावना किसी भी विभाजनकारी प्रयास को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से गुरु रविदास जी की सार्वभौमिक शिक्षाओं से प्रेरणा लेने की अपील की।
सेमिनार में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रो. मनजिंदर सिंह तथा तप स्थान श्री गुरु रविदास जी, खुरालगढ़ के संत केवल सिंह जी ने भी विचार रखे। इस दौरान एमिटी यूनिवर्सिटी, मोहाली के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पुनीत शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. दलीप कुमार सहित कई शिक्षाविद, फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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