Teachers के 12 जिलों में 500 से ज्यादा बैच
चंडीगढ़, 11 अगस्त (ध्रुव)। पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अपने प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ को स्कूलों तक पहुंचाते हुए 12 जिलों में Teachers के लिए विशेष जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के तहत 21,850 से अधिक शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और नशे के शुरुआती संकेत पहचानने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सरकार के अनुसार अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से इन जिलों में 500 से अधिक प्रशिक्षण बैच आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का और तरनतारन से हुई, जहां पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने कार्यशालाओं में हिस्सा लिया।
12 जिलों में चलेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला में आयोजित किया जाएगा।
इसका उद्देश्य Teachers को विद्यार्थियों में तनाव, चिंता, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और नशे की ओर बढ़ने के शुरुआती संकेतों को पहचानने के लिए व्यावहारिक कौशल देना है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक जरूरतमंद विद्यार्थियों को समय रहते उचित सहायता से जोड़ने में सक्षम होंगे।
अनुशासनहीनता नहीं, समस्या के संकेत पहचानेंगे Teachers
सरकार के मुताबिक किसी विद्यार्थी के व्यवहार में बदलाव को कई बार अनुशासनहीनता समझ लिया जाता है, जबकि उसके पीछे मानसिक स्वास्थ्य या अन्य गंभीर समस्या हो सकती है। ऐसे में शिक्षक सबसे पहले इन बदलावों को पहचानने की स्थिति में होते हैं।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ सजा या कठोर रवैये के बजाय संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करने, तनाव से स्वस्थ तरीके से निपटने के उपायों को प्रोत्साहित करने और जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाएगा।
अमृतसर में 2,800 शिक्षकों पर हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
पंजाब सरकार के अनुसार इससे पहले अमृतसर में शिक्षक प्रशिक्षण का एक पायलट कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। इनमें 75 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने बताया कि कार्यक्रम के बाद वे स्वस्थ स्कूल वातावरण तैयार करने में योगदान देने के लिए प्रेरित हुए।
इससे पहले जनवरी 2026 में नौ जिलों के सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा हेडमास्टरों के लिए भी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
डॉ. बलबीर सिंह बोले, हर बच्चे तक समय रहते पहुंचना जरूरी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के साथ काफी समय बिताते हैं और उनके व्यवहार में आने वाले ऐसे बदलावों को पहचान सकते हैं, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और नशे से जुड़े जोखिमों की बेहतर समझ देना है। शिक्षक तनाव और नशे की संवेदनशीलता के शुरुआती संकेतों को पहचानकर संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों को समय रहते मदद से जोड़ सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि पंजाब में किसी भी बच्चे को अपनी परेशानी चुपचाप सहने या सामाजिक कलंक का सामना करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत सरकार विद्यार्थियों को उचित देखभाल और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
SCERT और DITSU मिलकर संभालेंगे कार्यक्रम
यह अभियान एक अंतर-विभागीय पहल के रूप में चलाया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर इसके क्रियान्वयन में सहयोग करेगी।
वहीं, नशे के खिलाफ अभियान का नेतृत्व कर रही Data Intelligence and Technical Support Unit (DITSU) प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने और कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भूमिका निभाएगी।
जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के शिक्षक प्रशिक्षण सत्रों में शामिल हो सकें।
हर Teachers बनेगा विद्यार्थियों और नशे के बीच प्रहरी
एक दिवसीय जागरूकता-सह-क्षमता विकास सत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा नशे के मानसिक और सामाजिक प्रभावों से जुड़े पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रत्येक शिक्षक विद्यार्थियों और नशे के बीच प्रहरी की भूमिका निभाने की शपथ लेगा। इसके बाद शिक्षक विद्यार्थियों के साथ विभिन्न जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित करेंगे।
सरकार के मुताबिक प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और एक संरचित निगरानी व्यवस्था के माध्यम से पूरे कार्यक्रम की पहुंच और प्रभावशीलता पर भी नजर रखी जाएगी।
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