केंद्र और Punjab मिलकर बचाएंगे भूजल, किसानों को मिलेगा वैकल्पिक फसलों का फायदा
नई दिल्ली, 13 मई (ध्रुव)। Bhagwant Mann ने बुधवार को Shivraj Singh Chouhan से मुलाकात कर Punjab के किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि आगामी खरीफ सीजन में पंजाब में खादों की सप्लाई में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि Punjab सरकार अब धान की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए मक्का, दालें, तिलहन, सूरजमुखी और बाजरा जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि इससे भूजल स्तर को बचाने और पंजाब को तेजी से बढ़ रहे डार्क जोन संकट से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
Punjab में भूजल संकट पर बड़ा फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के कुल 150 ब्लॉकों में से 117 ब्लॉक पहले ही डार्क जोन में पहुंच चुके हैं। उन्होंने केंद्र से अपील की कि वैकल्पिक फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया जाए ताकि किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ सकें।
Food Corporation of India के गुणवत्ता मानकों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ हाइब्रिड धान बीजों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई हाइब्रिड किस्मों में मिलिंग के दौरान दाना टूटने की दर अधिक पाई गई है, जिससे किसानों को खरीद प्रक्रिया में परेशानी होती है।
केंद्र बनाएगा विशेष समिति
बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि हाइब्रिड धान बीजों के मुद्दे की जांच के लिए विशेष समिति बनाई जाएगी। साथ ही पंजाब में सुचारू खरीद और उठान व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पूरा सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं बीज सब्सिडी आवंटन की भी मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब देश की आबादी का सिर्फ 2 प्रतिशत होने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य भंडार में हर साल करीब 185 लाख मीट्रिक टन चावल और 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं का योगदान देता है।
केंद्रीय बीज समिति में पंजाब को प्रतिनिधित्व देने की मांग
बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्तावित बीज विधेयक-2025 के तहत केंद्रीय बीज समिति में पंजाब का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण पंजाब की भूमिका राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में बेहद अहम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण पर काम कर रही है।
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