पंजाब

Amarjit Chawla के मामले को क्या ठंडा करने की कोशिश हो रही है ?

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Is an attempt being made to downplay the Amarjit Chawla case
Is an attempt being made to downplay the Amarjit Chawla case

बलतेज पन्नू ने Amarjit Chawla के मामले को फिर से उठाया

चंडीगढ़, 25 सितंबर (ध्रुव)। श्री आनंदपुर साहिब की एसजीपीसी सराय से जुड़े विवाद और Amarjit Chawla तथा मलकीत सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अकाली दल के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। पन्नू ने एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से गठित चार सदस्यीय समिति और उसे रिपोर्ट देने के लिए दिए गए 15 दिनों के समय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले को ठंडा करने की कोशिश की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बलतेज पन्नू ने कहा कि हरजिंदर सिंह धामी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय वीडियो के माध्यम से सामने आए और चार सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की। उन्होंने सवाल किया कि समिति को 15 दिन का समय देने का उद्देश्य क्या है। क्या एसजीपीसी को उम्मीद है कि दो सप्ताह बाद लोग इस मामले को भूल जाएंगे? पन्नू ने कहा कि सिख बुद्धिजीवी और विभिन्न सिख संगठन लगातार सवाल उठा रहे हैं और एसजीपीसी को संगत को जवाब देना होगा।

समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए पन्नू ने पूछा कि क्या जूनियर सदस्य उन वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ कर सकते हैं, जिनके नाम इस विवाद में सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि एसजीपीसी वास्तव में निष्पक्ष जांच चाहती, तो किसी सेवानिवृत्त सिख जज या अनुभवी पुलिस अधिकारी को समिति में शामिल किया जा सकता था। पन्नू ने सवाल उठाया कि जांच और कानून का अनुभव रखने वाले किसी स्वतंत्र व्यक्ति को शामिल क्यों नहीं किया गया।

महिला को सराय में इतने समय तक रहने की अनुमति क्यों दी गई

बलतेज पन्नू ने यह भी पूछा कि क्या समिति के सदस्य सुखबीर सिंह बादल, हरजिंदर सिंह धामी और विवाद में नाम लिए जा रहे अन्य लोगों से पूछताछ करने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से की जाती है।

एसजीपीसी की सराय में महिला के लंबे समय तक रहने को लेकर पन्नू ने कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि महिला को सराय में इतने समय तक रहने की अनुमति क्यों दी गई और उसे वहां कौन लेकर आया था। उन्होंने सरबजीत सिंह झिंझर और विरसा सिंह वल्टोहा की कथित भूमिका पर भी सवाल करते हुए पूछा कि क्या समिति महिला को सराय में लाए जाने की परिस्थितियों और इससे जुड़े लोगों से पूछताछ करेगी। Amarjit Chawla

पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी ने Amarjit Chawla और मलकीत सिंह को पंथ से बाहर किए जाने के बाद भी अपनी संस्थाओं और गुरुद्वारों के बाहर संगत को जानकारी देने वाले बोर्ड नहीं लगाए। उन्होंने सवाल किया कि यदि दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, तो एसजीपीसी ने इस संबंध में संगत को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी।

आप नेता ने महिला के चरित्र और उसके कथित अतीत को लेकर की जा रही बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुख्य सवाल यह है कि एसजीपीसी की सराय में क्या हुआ, महिला को वहां कौन लेकर आया, उसे वहां क्यों रखा गया और एसजीपीसी नेतृत्व को इस पूरे घटनाक्रम की कितनी जानकारी थी। पन्नू ने आरोप लगाया कि मूल सवालों का जवाब देने के बजाय ध्यान महिला पर केंद्रित करने की कोशिश की जा रही है।

Amarjit Chawla : भाजपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते के कारण भाजपा नेता चुप

बलतेज पन्नू ने अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया इस मामले पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं। हरसिमरत बादल को लेकर पन्नू ने कहा कि वह राजनीतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के लिए महिलाओं को एकत्र करती हैं, लेकिन जब किसी महिला से जुड़े गंभीर आरोपों पर जवाब देने की बात आती है, तो उनकी चुप्पी सामने आती है।

कांग्रेस और भाजपा नेताओं को भी निशाने पर लेते हुए पन्नू ने कहा कि प्रताप सिंह बाजवा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और भाजपा के प्रवक्ता इस मुद्दे पर बहसों और सार्वजनिक बयानों से दूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल और भाजपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते के कारण भाजपा नेता चुप हैं। यह आरोप पन्नू के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि स्रोत सामग्री में नहीं है।

पन्नू ने एसजीपीसी चुनावों से जुड़े घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने समिति के एक सदस्य का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या वह वही व्यक्ति हैं, जो एसजीपीसी चुनावों के संबंध में हाईकोर्ट गए थे और जिनकी याचिका के बाद चुनाव रुक गए थे। उन्होंने यह भी सवाल किया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से जुड़े व्यक्ति को इस विवाद की जांच के लिए गठित समिति में शामिल करते समय किन बातों को ध्यान में रखा गया।

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Rajesh Sachdeva

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