पंचायतों और नगर निकायों की वित्तीय मजबूती पर भगवंत मान का जोर
चंडीगढ़, 22 सितंबर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन और जरूरी नागरिक सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों, नगर निगमों और नगर परिषदों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को नवगठित सातवें Punjab Finance Commission के साथ बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिरता के लिए राज्य को अनुशासित वित्तीय व्यवस्था और टिकाऊ वित्तीय संस्थानों की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों और शहरी निकायों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए संसाधनों के बंटवारे की व्यवस्था पारदर्शी, न्यायसंगत और लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सातवें Punjab Finance Commission का गठन पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच करों, शुल्कों, सड़क कर तथा अन्य राजस्व की हिस्सेदारी को लेकर सिफारिशें देने के साथ-साथ स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किया गया है। आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं को वित्तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि 73वें संविधान संशोधन के तहत गठित जमीनी स्तर की संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता मिलनी चाहिए। आयोग की जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों की वित्तीय स्थिति, देनदारियों और आर्थिक स्थिरता का आकलन कर एक मजबूत वित्तीय ढांचे की सिफारिश करना है।
Punjab Finance Commission की सिफारिशें व्यावहारिक होने के साथ-साथ भविष्य
भगवंत मान ने उम्मीद जताई कि आयोग स्थानीय निकायों की आय क्षमता, खर्च से जुड़ी जिम्मेदारियों और वित्तीय जरूरतों का व्यापक मूल्यांकन करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशें व्यावहारिक होने के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए, ताकि पंचायतें और नगर निकाय अपने कार्यों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आयोग राज्य की ओर से लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस से होने वाली कुल प्राप्तियों में राज्य तथा पंचायतों और नगरपालिकाओं की हिस्सेदारी को लेकर सिफारिश कर सकता है। इसके अलावा, विभिन्न स्तरों की पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच राजस्व के वितरण का आधार तय करने में भी आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि आयोग गैर-उत्पादक राजस्व खर्च को कम करने, पूंजीगत संसाधनों के कुशल इस्तेमाल और प्रशासनिक क्षमता में सुधार के उपाय सुझा सकता है। स्थानीय निकायों को तकनीकी सहायता और बेहतर प्रशासन उपलब्ध कराने के लिए भी आयोग सिफारिशें करेगा।
Punjab Finance Commission को 30 सितंबर 2027 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994’ की धारा 3(1) के तहत पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद की अध्यक्षता में सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया गया है। आयोग में शौकत राय को विशेषज्ञ सदस्य बनाया गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव पदेन सदस्य होंगे, जबकि विशेष सचिव, वित्त विभाग को पदेन सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
भगवंत मान ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार आयोग को उसके कार्य के लिए पूरा सहयोग और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि आयोग का पांच वर्ष का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और उसे 30 सितंबर 2027 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। आयोग अपने निष्कर्षों के आधार को भी स्पष्ट करेगा, ताकि उसकी सिफारिशों की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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