कौन नहीं चाहता था कि Lok Sabha में पास ना हो बिल ?
चंडीगढ़, 17 अप्रैल (ध्रुव)। Lok Sabha में महिला आरक्षण से जुड़ा बिल पास नहीं हो पाया है परंतु क्या यह सुनकर हैरानी नहीं हो रही है कि सत्ता में भाजपा सरकार होने के बावजूद भी बिल पास ना हो पाया हो ?
ऐसा क्या हुआ है लोकसभा में की सत्ताधारी पार्टी भाजपा मात्र 352 वोट नहीं हासिल कर पाई और इस अहम बिल को पास करवाने से वह 54 वोटो से चूक गई। क्या इसके पीछे कोई बड़ा कारण है या कोई ऐसा बड़ा व्यक्ति चाहता ही नहीं था कि यह बिल लोक सभा में पास हो, यह सवाल खड़ा हो रहा है ?
महिलाओ को बड़ा नुकसान तो अब नहीं बढ़ेगी सीटें
इस बिल के पास नहीं होने के चलते सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को होगा क्योंकि यह बिल उन्हें आरक्षण देने जा रहा था। केंद्र सरकार लोकसभा में हारने के साथ-साथ अब विपक्ष को भी घेरने लग गई है कि उनके चलते महिलाओं को मिलने वाला देश में पहली बार बाद आरक्षण छूट जाएगा।
लोकसभा में संविधान का 131 वां संशोधन बिल पेश होने के पश्चात वोटिंग के लिए आया था जिसमें 543 सीटों को बढ़ाकर 850 सीटों को करने का प्रावधान भी शामिल था।
21 घंटे की लंबी चर्चा के पश्चात लोकसभा में 528 सांसद मेंबरों की तरफ से वोट डालेंगे जिसमें 298 पक्ष में पड़े जबकि 230 वोट विपक्ष में पड़े। इस बिल को पास करवाने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी इसके हिसाब से 352 वोट जरूरी थे परंतु 298 वोट मिलने के चलते यह 54 वोटो से बिल पास होने से रह गया है