चंडीगढ़, 13 अक्टूबर। शिरोमणि अकाली दल (बादल) की Save Punjab मुहिम को लेकर आम आदमी पार्टी ने तीखा हमला बोला है। आप पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि बादल परिवार पंजाबियों को एक बार फिर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों के समर्थन, वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं और कोटकपूरा व बहबल कलां गोलीकांड को लेकर अकाली दल का रुख पंजाब के लोग भूले नहीं हैं।
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पन्नू ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में नशे, गैंगस्टरों और परिवहन, केबल तथा रेत कारोबार से जुड़े माफिया के बढ़ने के आरोप सामने आए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस दौर में अकाली दल सत्ता में था, उस समय पंजाब की इन समस्याओं पर उसकी क्या जिम्मेदारी थी? अब Save Punjab के नारे लगाने वाली अकाली लीडरशिप को अपने पुराने कार्यकाल का हिसाब भी देना चाहिए।
तीन कृषि कानूनों को लेकर भी पन्नू ने बादल परिवार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इन कानूनों का अकाली नेताओं ने शुरुआत में समर्थन किया था। प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल ने अपना रुख तब बदला, जब किसानों का विरोध तेज हुआ और इन कानूनों के खिलाफ पंजाब में व्यापक आंदोलन खड़ा हो गया।
शुरुआत में उन कानूनों का समर्थन क्यों किया
पन्नू ने कहा कि मंडी व्यवस्था पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। ऐसे में अकाली दल को स्पष्ट करना चाहिए कि उसने शुरुआत में उन कानूनों का समर्थन क्यों किया, जिनके खिलाफ किसान लंबे समय तक आंदोलन करते रहे। उन्होंने ग्रामीण विकास निधि रोकने के मुद्दे पर भी अकाली दल से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए पन्नू ने सुखबीर बादल के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली नेतृत्व ने पहले जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कही, लेकिन बाद में अपने बयान दबाव में दिए जाने का दावा किया। पन्नू ने कहा कि कोटकपूरा में पुलिस कार्रवाई और बहबल कलां गोलीकांड में दो लोगों की मौत पंजाब के लोगों के लिए आज भी गंभीर सवाल हैं। अकाली नेतृत्व को इन घटनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में हाल ही में हुई घटना को लेकर हरसिमरत कौर बादल की सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाने पर भी पन्नू ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सिख समुदाय और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में अकाली नेतृत्व बार-बार अपना रुख क्यों बदलता है। उनके मुताबिक, सिख भावनाओं का हवाला देने वाले नेताओं से स्पष्ट और स्थिर जवाब की अपेक्षा की जाती है।
Save Punjab जैसे नारे लगाने से अकाली दल अपने विवादों से पीछा नहीं छुड़ा सकता
श्री आनंदपुर साहिब की एक सराय में रहने वाली महिला से जुड़े मामले पर भी पन्नू ने सुखबीर बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की भूमिका और संबंधित मामले में पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा।
बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर पन्नू ने कहा कि अकाली नेताओं के पुराने पत्रों और बयानों के आधार पर उनके रुख पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग जानना चाहते हैं कि सिख समुदाय और पंजाब से जुड़े अहम मुद्दों पर अकाली दल का रुख बार-बार क्यों बदलता रहा है।
पन्नू ने कहा कि ‘पंजाब बचाओ’ जैसे नारे लगाने से अकाली दल अपने पुराने फैसलों और विवादों से पीछा नहीं छुड़ा सकता। उनके मुताबिक, पंजाब के लोग कृषि कानूनों, बेअदबी की घटनाओं और बहबल कलां गोलीकांड को लेकर अकाली नेतृत्व के रुख को याद रखते हैं। राजनीतिक मुहिम और नए नारों से जनता का खोया हुआ भरोसा वापस नहीं पाया जा सकता।
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