पंजाब

बादल परिवार ने अकाली दल को पारिवारिक पार्टी बना दिया : Baltej Pannu

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Badal family has turned the Akali Dal into a family-run party says Baltej Pannu
Badal family has turned the Akali Dal into a family-run party says Baltej Pannu

चंडीगढ़, 21 सितंबर (ध्रुव)। आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी Baltej Pannu ने बादल परिवार और शिरोमणि अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कुर्बानियों और पंथक संघर्षों से बने अकाली दल को एक परिवार की राजनीतिक पार्टी में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिख संस्थाओं का इस्तेमाल निजी और राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है। पन्नू ने श्री आनंदपुर साहिब की सराय में एक महिला को कथित तौर पर महीनों तक रखे जाने से जुड़े विवाद का हवाला देते हुए अमरजीत सिंह चावला, अकाली दल के नेताओं और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Baltej Pannu ने कहा कि अकाली मोर्चों का इतिहास कुर्बानियों का इतिहास रहा है। आम अकाली कार्यकर्ता जेल जाते थे और अपनी कुर्बानियों के आधार पर सम्मान हासिल करते थे। उन्होंने कहा कि ‘जत्थेदार’ जैसे संबोधन किसी राजनीतिक परिवार की ओर से दिए जाने वाले पद नहीं, बल्कि योगदान और संघर्ष से अर्जित किए जाते थे। पन्नू के मुताबिक, बादल परिवार के प्रभाव के बाद अकाली दल की मूल पंथक भावना कमजोर हुई और पार्टी पारिवारिक हितों तक सीमित हो गई।

Baltej Pannu ने कहा कि ‘शिरोमणि अकाली दल बादल’ नाम ही इस बात का संकेत है कि पार्टी एक परिवार के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि बादल नेतृत्व वाले अकाली दल ने सिख समुदाय के लिए कौन-सा स्पष्ट एजेंडा तय किया है और सिख संस्थाओं के संचालन में निजी तथा राजनीतिक हितों की भूमिका क्यों दिखाई देती है।

अमरजीत सिंह चावला को इतनी शक्तियां किसने दीं : Baltej Pannu

अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज हालिया एफआईआर का उल्लेख करते हुए आप नेता ने श्री आनंदपुर साहिब की एसजीपीसी सराय में एक महिला को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखने के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि महिला को महीनों तक वहां रहने की अनुमति किसने दी, उसे कमरा, वाहन और अन्य सुविधाएं किसके निर्देश पर उपलब्ध कराई गईं तथा इनका खर्च किसने उठाया। पन्नू ने यह भी पूछा कि विरसा सिंह वल्टोहा और सरबजीत सिंह झिंजर उस महिला को श्री आनंदपुर साहिब क्यों लेकर आए और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे क्या उद्देश्य था।

एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पन्नू ने पूछा कि जब महिला शिकायत लेकर उनके पास पहुंची तो उस पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यदि धामी का कहना था कि मामले को पुलिस के बजाय संस्था के स्तर पर संभाला जा सकता है, तो फिर कई सप्ताह और महीनों तक चुप्पी क्यों रही। पन्नू ने धामी से स्पष्ट करने की मांग की कि वह बादल परिवार के राजनीतिक सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं या गुरु के सेवक के तौर पर।

पन्नू ने हरसिमरत कौर बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य अकाली नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो नेता दूसरे मुद्दों पर लगातार सार्वजनिक बयान देते हैं और लाइव होकर अपनी बात रखते हैं, वे इस मामले में जवाब देने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल से पूछा कि अमरजीत सिंह चावला को इतनी शक्तियां किसने दीं, इन शक्तियों का आधार क्या था और एसजीपीसी से जुड़ी संस्थाओं में इस तरह की स्थिति कैसे पैदा हुई।

2015 से 2017 के बीच हुई घटनाओं को पंजाब के लोग अब भी नहीं भूले

2015 के बेअदबी विवाद और कोटकपूरा तथा बहबल कलां गोलीकांड का जिक्र करते हुए पन्नू ने बादल सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बेअदबी की घटनाओं के बाद प्रदर्शन कर रहे सिख समुदाय के साथ सख्ती की गई और इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब के लोगों तथा सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि 2015 से 2017 के बीच हुई घटनाओं को पंजाब के लोग अब भी नहीं भूले हैं।

पन्नू ने बटाला स्थित गुरुद्वारा कंध साहिब में सुच्चा सिंह लंगाह को मंच दिए जाने के विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख समुदाय के विरोध के बावजूद ऐसे लोगों को मंच उपलब्ध कराना संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई के मानदंड समान क्यों नहीं हैं और सिख संस्थाओं के फैसलों में राजनीतिक प्रभाव की भूमिका क्यों दिखाई देती है।

बलतेज पन्नू ने मांग की कि एसजीपीसी गुरुद्वारों और सरायों के बाहर उन व्यक्तियों के नाम और तस्वीरें लगाए, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पंथ से निष्कासित किया गया है, ताकि संगत को जानकारी मिल सके।

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Rajesh Sachdeva

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