पुलिस कार्रवाई से लेकर इलाज तक पांच मोर्चों पर फोकस
चंडीगढ़, 21 सितंबर (ध्रुव)। पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार (Mann Government) ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को पांच प्रमुख मोर्चों पर केंद्रित किया है। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत नशे की सप्लाई चेन पर पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, सामुदायिक निगरानी, युवाओं की भागीदारी और नशामुक्ति एवं पुनर्वास सेवाओं पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की रणनीति का उद्देश्य नशा तस्करी पर शिकंजा कसने के साथ-साथ युवाओं को नशे से दूर रखना और लत से जूझ रहे लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
सरकार के मुताबिक, नशे के खिलाफ लड़ाई को अब पुलिस थानों तक सीमित नहीं रखा गया है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, समुदायों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस नशे की आपूर्ति के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है, जबकि शिक्षक जोखिम के शुरुआती संकेतों की पहचान, सामुदायिक प्रतिनिधि निगरानी और सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा स्वास्थ्यकर्मी उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था में भूमिका निभा रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई के तहत मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच पंजाब की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 61,824 एफआईआर दर्ज करने और 81,433 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इसी अवधि में 3,918 किलोग्राम हेरोइन, 991 किलोग्राम अफीम, 47 टन पोस्त की भूसी, 1,416 किलोग्राम गांजा और 65 लाख टैबलेट एवं कैप्सूल बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। पंजाब पुलिस ने अभियान के दौरान 79,293 जनसभाएं आयोजित कर नशे के खिलाफ जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का भी दावा किया है।
Mann Government में 14 सप्ताह का नशा-विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा
सरकार की पांच सूत्रीय रणनीति का दूसरा प्रमुख हिस्सा स्कूलों में रोकथाम से जुड़ा है। प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से 3,600 स्कूलों में 7.5 लाख विद्यार्थियों को 14 सप्ताह का नशा-विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में 13 जिलों के करीब 25,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना है। सरकार के अनुसार, अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में 7,000 शिक्षक पहले ही संवेदनशील बनाए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और नशे की ओर बढ़ने के जोखिम के शुरुआती संकेत पहचानने में सक्षम बनाना है।
तीसरे मोर्चे के तहत युवाओं और सहपाठी नेटवर्क को अभियान से जोड़ा गया है। स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं की अगुवाई वाली गतिविधियों, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मानसिक स्वास्थ्य क्लबों और नशे से उबर चुके लोगों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि युवाओं को केवल नशे से दूर रहने की सलाह देने के बजाय उन्हें स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक गतिविधियों के विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है।
चौथे मोर्चे के तहत गांवों और शहरी वार्डों में सामुदायिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया गया है। सितंबर 2026 तक करीब 15,000 ग्राम एवं वार्ड रक्षा समितियों से लगभग 1.25 लाख सदस्य जुड़ चुके हैं। इनमें से 50,000 से अधिक सदस्यों को ‘नशा मुक्ति ऐप’ के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार के अनुसार, 1 मार्च 2025 को शुरू की गई सेफ पंजाब व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 97791-00200 पर अब तक 51,000 से अधिक सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनके आधार पर नशे से जुड़े मामलों में 25,000 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं।
नशे की सप्लाई पर रोक लगाना और युवाओं को नशे से बचाना : Mann Government
पांचवां मोर्चा नशामुक्ति और पुनर्वास सेवाओं के विस्तार से जुड़ा है। पंजाब में वर्तमान में 547 ओओएटी केंद्र, 219 नशामुक्ति केंद्र और 91 पुनर्वास केंद्र संचालित होने की जानकारी दी गई है। सरकारी केंद्रों में कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मरीजों को उपचार के दौरान सक्रिय रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिल होने वाले लोगों की संख्या 2024 में 12,200 से अधिक थी, जो 2025 में बढ़कर करीब 34,000 हो गई। सरकार ने इसे 170 प्रतिशत से अधिक वृद्धि बताया है।
‘बिग 5’ अभियान के तहत सरकार का दावा है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम, सूचना, सामुदायिक भागीदारी और उपचार से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Mann Government) के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का घोषित लक्ष्य नशे की सप्लाई पर रोक लगाना, युवाओं को नशे से बचाना, गांवों और समुदायों को सक्रिय करना तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था को सुलभ बनाना है।
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