Punjab की मुख्यमंत्री सेहत योजना से 4.43 लाख मरीजों का मुफ्त इलाज
चंडीगढ़, 5 जुलाई, (सुनील कुमार)। पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना Punjab राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाती नजर आ रही है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) पंजाब के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 4,43,906 से अधिक मरीजों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि 782.79 करोड़ रुपये का कैशलेस उपचार सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए लोगों को इलाज के भारी खर्च से राहत मिल रही है और यह Punjab राज्य की सबसे प्रभावी जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो चुकी है।
Punjab का पटियाला बना नंबर-1 जिला
योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों की संख्या के मामले में पटियाला जिला पूरे पंजाब में पहले स्थान पर है। यहां 52,672 मरीजों के इलाज पर 79.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके बाद:
- बठिंडा – 30,813 मरीज, 76.81 करोड़ रुपये
- लुधियाना – 44,227 मरीज, 60.54 करोड़ रुपये
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पटियाला में अस्पतालों के बेहतर नेटवर्क और लोगों में अधिक जागरूकता के कारण योजना का सबसे अधिक लाभ मिला है।
डॉ. बलबीर सिंह बोले - बीमारी के कारण कोई परिवार कर्जदार न बने
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना ने हजारों परिवारों को महंगे इलाज के आर्थिक बोझ से बचाया है।
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए जीवनरेखा है जिन्हें अस्पताल का बिल बीमारी से भी ज्यादा डराता था। हमारा लक्ष्य है कि पंजाब का कोई भी परिवार इलाज के कारण कर्ज में न डूबे।"
Punjab के अन्य जिलों में भी तेजी से बढ़ रहा लाभ
योजना का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। राज्य के कई अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग इस योजना का फायदा उठा रहे हैं।
प्रमुख आंकड़े:
- जालंधर – 27,682 मरीज
- अमृतसर – 20,503 मरीज
- एसएएस नगर (मोहाली) – 20,085 मरीज
- कपूरथला – 9,384 मरीज
- मलेरकोटला – 3,181 मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुरदासपुर, रूपनगर, संगरूर, होशियारपुर और फिरोजपुर जैसे जिलों में भी योजना के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिल रहा बड़ा लाभ
मानसा के किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि यदि मुख्यमंत्री सेहत योजना नहीं होती तो इलाज के लिए उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ती। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बिना किसी आर्थिक बोझ के इलाज मिल सका है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सूचीबद्ध अस्पतालों का नेटवर्क लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि राज्य के हर जिले के लोगों को गुणवत्तापूर्ण और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
यह भी पढ़े :- कांग्रेस बताए, पंजाब में पार्टी चला कौन रहा है, राजा वड़िंग, रंधावा या चन्नी ?