Fast Track Court नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए : केजरीवाल
प्रधानमंत्री लीपापोती कर शिक्षा मंत्री को बचाने की कोशिश कर रहे
नई दिल्ली, 23 जुलाई (ध्रुव)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक के मामलों में Fast Track Court बनाए जाने की घोषणा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे बच्चों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग नहीं की थी, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के जरिए मामले की लीपापोती कर रहे हैं और धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
केजरीवाल ने गुरुवार को इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है, लेकिन यह बच्चों की मांग नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार बच्चों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही कई मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट मौजूद हैं। दुष्कर्म और पॉक्सो सहित कई मामलों में Fast Track Court बनाए गए हैं, लेकिन कई जगहों पर मामलों की सुनवाई में देरी होती है और कुछ मामलों में सामान्य अदालतों की तुलना में भी अधिक समय लग जाता है। ऐसे में केवल Fast Track Court की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
Fast Track Court से कुछ नहीं होने वाला
केजरीवाल ने कहा कि बच्चों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई बात नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अभी भी मामले को दबाने और शिक्षा मंत्री को बचाने की कोशिश कर रही है।
आप संयोजक ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों के सिर में चोटें आईं, उनकी टांगें टूटीं, उन पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उन्होंने दावा किया कि कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं।
केजरीवाल ने कहा कि वह स्वयं जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले और उनकी स्थिति देखी। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने छात्रों के प्रति सहानुभूति जताते हुए एक शब्द भी क्यों नहीं कहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया में कहीं भी कुछ होने पर इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर उन्होंने कोई बात नहीं की।
व्यवस्था में बदलाव नहीं किया तो वर्षों तक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ सकती
उन्होंने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि हर साल किसी न किसी परीक्षा में पेपर लीक की खबरें सामने आती हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि ऐसी व्यवस्था में क्या बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को भरोसा हो कि अगले वर्ष नीट या किसी अन्य महत्वपूर्ण परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं होगा।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कोई स्पष्ट और ठोस योजना सामने नहीं रखी है। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आ सकती हैं और छात्रों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें यह एक हारे हुए, दिशाहीन और अहंकारी व्यक्ति का बयान प्रतीत होता है।
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