पंजाब

महिलाओं को भी सम्मान दे रही Mawan Dhiyan Satkar Yojana

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Mawan Dhiyan Satkar Yojana is also according respect to women
Mawan Dhiyan Satkar Yojana is also according respect to women

आज तक किसी सरकार ने महिलाओं को इतना सम्मान नहीं दिया : Bhagwant Mann

चंडीगढ़, 23 जुलाई (ध्रुव)। पंजाब की 100 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए भगवंत मान सरकार की Mawan Dhiyan Satkar Yojana आर्थिक सहायता के साथ-साथ सम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का सहारा बन रही है। योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता से बुजुर्ग महिलाएं अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपनी इच्छा के अनुसार राशि खर्च कर रही हैं।

इन महिलाओं में कई ऐसी हैं जिन्हें उम्र के कारण चलने-फिरने, सुनने या बोलने में परेशानी होती है। इसके बावजूद उनका कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली राशि उन्हें यह एहसास कराती है कि यह पैसा उनका अपना है और वे इसे अपनी जरूरत और इच्छा के अनुसार खर्च कर सकती हैं।

कई लाभार्थी महिलाओं ने बताया कि उन्हें योजना की जानकारी पड़ोसियों और रिश्तेदारों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों की मदद से नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी की। लाभार्थियों के अनुसार यह आर्थिक सहायता वृद्धावस्था या विधवा पेंशन के अतिरिक्त मिलने के कारण उनके लिए और भी महत्वपूर्ण है।

Mawan Dhiyan Satkar Yojana : भरपूर कौर बोलीं- बेटियों पर खर्च करूंगी पैसा

संगरूर की 109 वर्षीय भरपूर कौर ने अपनी पड़पोते की पत्नी की मदद से योजना के लिए आवेदन किया। अब वह उसी की सहायता से बैंक से राशि निकालती हैं। उन्होंने कहा कि वह योजना के तहत मिली राशि का एक हिस्सा अपनी बेटियों पर खर्च करेंगी, जिनकी उम्र भी 50 वर्ष से अधिक है, जबकि बाकी राशि से अपने लिए सुनने की मशीन खरीदेंगी।

भरपूर कौर ने कहा कि उन्हें सुनने में परेशानी होती है, लेकिन इसके अलावा वह खुद को स्वस्थ महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि आज तक किसी सरकार ने ऐसा काम नहीं किया।

110 वर्षीय मुख्तियार कौर ने कहा- महिलाओं को इतना सम्मान पहले नहीं मिला

कोटकपूरा की 110 वर्षीय मुख्तियार कौर को भी ‘माँवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत आर्थिक सहायता मिली है। उन्हें सुनने में कठिनाई होती है, लेकिन वह स्पष्ट रूप से बोलती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने सहायता राशि का इस्तेमाल घर-गृहस्थी की जरूरतों को पूरा करने में किया।

मुख्तियार कौर ने कहा कि उन्होंने इससे पहले किसी सरकार को पंजाब की महिलाओं को इतना सम्मान देते नहीं देखा।

Mawan Dhiyan Satkar Yojana : जसमेल कौर बोलीं- इस उम्र में पैसा सबसे बड़ा सहारा

फरीदकोट की 102 वर्षीय जसमेल कौर ने अपना अधिकांश जीवन परिवार की देखभाल में बिताया। उन्होंने योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता का कुछ हिस्सा अपनी दवाइयों पर खर्च किया और कुछ राशि अपने दामाद के इलाज के लिए बेटी को दे दी।

जसमेल कौर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भगवंत मान सरकार महिलाओं का इतना ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि इस उम्र में पैसा सबसे बड़ा सहारा बन जाता है और जीवन के हर काम के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।

प्रीतम कौर के परिवार ने सहायता राशि से खरीदी व्हीलचेयर

मोगा की 102 वर्षीय प्रीतम कौर उम्र के कारण बेहद कमजोर हैं और उन्हें सुनने में भी परेशानी होती है। उनके पुत्र सिकंदर सिंह ने बताया कि योजना के तहत मिली 3,000 रुपये की सहायता से उनकी मां का जीवन कुछ आसान हुआ है।

परिवार ने इस राशि से प्रीतम कौर के लिए व्हीलचेयर खरीदी, जिससे अब वह घर के भीतर आसानी से आ-जा सकती हैं। शेष राशि दवाइयों पर खर्च की गई।

Mawan Dhiyan Satkar Yojana अंग्रेज कौर बोलीं- पैसा अपने पास रखूंगी, जहां मन करेगा खर्च करूंगी

102 वर्षीय अंग्रेज कौर भी योजना से बेहद खुश हैं। सुनने में कठिनाई के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह यह पैसा अपने पास रखेंगी और जहां उनका मन करेगा, वहीं खर्च करेंगी।

उन्होंने बताया कि सहायता राशि से उन्होंने अपनी दवाइयां खरीदीं, अपने लिए नया सूट लिया और कुछ पैसे अपनी पोती पर भी खर्च किए।

बुजुर्ग महिलाओं के लिए सम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार बनी योजना

100 वर्ष से अधिक आयु की इन महिलाओं के जीवन में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और शारीरिक सीमाएं हैं, लेकिन ‘माँवां धीयां सत्कार योजना’ के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता उन्हें अपनी जरूरतों पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता दे रही है।

लाभार्थियों के अनुभवों के अनुसार यह सहायता केवल बैंक खाते में पहुंचने वाली राशि नहीं है, बल्कि उनके लिए सम्मान, गरिमा और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन रही है। इन बुजुर्ग महिलाओं की कहानियां यह संदेश देती हैं कि जीवन के हर पड़ाव पर सम्मान और अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण होती है।

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Rajesh Sachdeva

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