पंजाब

Mental Health भी स्वास्थ्य देखभाल का अहम हिस्सा

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Mental Health is also a crucial part of healthcare
Mental Health is also a crucial part of healthcare

Mental Health, न्यूरोटिक और तनाव संबंधी विकारों का इलाज शामिल

चंडीगढ़, 17 सितंबर (ध्रुव)। Mental Health को अक्सर लोग सामान्य चिंता या स्वभाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब यही तनाव लगातार बना रहे और व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी, कामकाज, नींद या रिश्तों को प्रभावित करने लगे तो यह स्वास्थ्य समस्या का रूप ले सकता है। पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना में ऐसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों के उपचार को भी शामिल किया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या परिवार को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का इलाज तब तक नहीं टालना चाहिए, जब तक स्थिति आर्थिक या भावनात्मक टूटन तक न पहुंच जाए।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य को ‘मानसिक विकार’ श्रेणी में शामिल किया गया है। योजना में न्यूरोटिक, तनाव संबंधी और सोमैटोफॉर्म विकारों के उपचार पैकेज को नियमित उपचार की श्रेणी में रखा गया है। इसका उद्देश्य पात्र परिवारों के लिए मानसिक स्वास्थ्य उपचार को अधिक सुलभ बनाना और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में देरी की स्थिति को कम करना है।

Mental Health के साथ शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे सकते

इन विकारों में अत्यधिक चिंता, डर, बेचैनी, फोबिया, जुनूनी-बाध्यकारी विकार, गंभीर तनाव के बाद होने वाली प्रतिक्रियाएं और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने से जुड़ी मानसिक समस्याएं शामिल हो सकती हैं। कई मामलों में मानसिक परेशानी के साथ शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

सिविल अस्पताल बरनाला के परामर्शदाता मनोचिकित्सक डॉ. गगनदीप सेखों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अक्सर तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक उनका असर व्यक्ति के सामान्य जीवन पर साफ दिखाई देने न लगे। उन्होंने कहा कि तनाव संबंधी विकार व्यक्ति की दिनचर्या, काम करने की क्षमता और रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।

डॉ. सेखों के अनुसार, तनाव को शरीर की चेतावनी व्यवस्था की तरह समझा जा सकता है। किसी खतरे या दबाव की स्थिति में इसका सक्रिय होना सामान्य है, लेकिन खतरा या परिस्थिति समाप्त होने के बाद भी यदि चिंता और बेचैनी बनी रहे तो यह समस्या का संकेत हो सकता है। लगातार चिंता, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई, नींद में परेशानी और हर समय बेचैनी इसके लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में तेज धड़कन, पसीना, कंपकंपी, जी मिचलाना और मांसपेशियों में खिंचाव जैसे शारीरिक लक्षण भी सामने आ सकते हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में व्यक्ति की मानसिक परेशानी शारीरिक लक्षणों के रूप में भी सामने आती है। दर्द, शरीर में भारीपन या पेट फूलने जैसी शिकायतें लगातार बनी रह सकती हैं। ऐसे लक्षणों को केवल यह कहकर खारिज करना उचित नहीं है कि समस्या व्यक्ति के दिमाग में है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझते हुए ऐसे मामलों में उचित चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

नींद की कमी भी व्यक्ति की तनाव से निपटने की क्षमता को प्रभावित

मानसिक तनाव की शुरुआत किसी बड़े जीवन परिवर्तन के बाद भी हो सकती है। किसी करीबी की मृत्यु, अलगाव, बीमारी, आर्थिक संकट या जीवन में अचानक आए बदलाव के अलावा लंबे समय तक काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, अनिश्चितता और नींद की कमी भी व्यक्ति की तनाव से निपटने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

डॉ. सेखों ने 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस उम्र में लोग करियर, परिवार, रिश्तों और आर्थिक जिम्मेदारियों से जुड़े कई दबावों का सामना करते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते मदद लेना जरूरी है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य उपचार को शामिल करने का उद्देश्य लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक बाधा इलाज में रुकावट न बने। उन्होंने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने या टालने के बजाय समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की अपील की।

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Rajesh Sachdeva

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