Punjab Jail : जेलों में स्वास्थ्य और पुनर्वास पर पंजाब सरकार का फोकस
चंडीगढ़/लुधियाना, 27 जून (सुनील कुमार)। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने Punjab Jail में बंद कैदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लुधियाना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC), पंजाब जेल विभाग और गैर-सरकारी संस्था टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन (TYCIA) ने मिलकर जेलों में नशा मुक्ति, एचआईवी रोकथाम और कैदियों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
बैठक में पंजाब सरकार, जेल विभाग और देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा जेलों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं, नशा मुक्ति सेवाओं और पुनर्वास व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रहे 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान के तहत नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के मरीज और तस्कर में स्पष्ट अंतर होना चाहिए तथा नशे के शिकार लोगों को अपराधी नहीं बल्कि मरीज मानकर उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
Punjab Jail में हेपेटाइटिस, एचआईवी और नशे से संबंधित स्वास्थ्य जांच भी कराई गई
उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष और तीन महीनों में 10 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को जेल भेजने की बजाय नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा 25 हजार कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी और नशे से संबंधित स्वास्थ्य जांच भी कराई गई है। पंजाब की जेलों में पहले से संचालित ओओएटी (OOAT) क्लीनिक, मनोचिकित्सक, काउंसलर और कौशल विकास कार्यक्रम कैदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि पंजाब एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषसिद्धि के मामलों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सुधारात्मक न्याय और पुनर्वास व्यवस्था को भी समान महत्व दे रही है।
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने जेलों में नशा उपचार, एचआईवी रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, महिलाओं के स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों की रोकथाम, ओपिओइड आधारित उपचार, स्क्रीनिंग प्रणाली तथा उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और जेल से रिहाई के बाद भी उपचार जारी रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव
दक्षिण एशिया के लिए UNODC की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा कि बदलती चुनौतियों के अनुसार समाधान भी आधुनिक और प्रभावी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करना न केवल कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा, बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक के अंत में सभी विभागों ने मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए जेलों में नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने तथा कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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