Fake Video विवाद : साजिशकर्ता कौन ? अब पंजाब पुलिस की जांच पर टिकीं निगाहें
डीजीपी कार्यालय पहुंचेगी आप नेतृत्व टीम, पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग
चंडीगढ़ 18 जून (सुनील कुमार)। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की कथित Fake Video को लेकर पंजाब की राजनीति में घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सुनियोजित साजिश बताते हुए इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग उठाई है। अब सबकी निगाहें पंजाब पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस कथित फर्जी वीडियो (Fake Video) को तैयार करने, फैलाने और प्रचारित करने के पीछे कौन लोग शामिल है।
आम आदमी पार्टी के सभी बड़े नेता, मंत्री और विधायक कुछ ही देर में (3 बजे) पंजाब के डीजीपी कार्यालय पहुंचकर औपचारिक शिकायत सौंपेंगे। पार्टी की मांग है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर यह पता लगाया जाए कि वीडियो सबसे पहले किसने तैयार की, किस व्यक्ति ने इसे पत्रकारों तक पहुंचाया और इसके पीछे मुख्य साजिशकर्ता कौन है।
जांच के घेरे में कई सवाल
इस पूरे विवाद के बीच कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वीडियो किसी संगठित नेटवर्क के जरिए तैयार की गई? क्या इसे पहले मीडिया में चलवाने की कोशिश हुई? और जब वहां सफलता नहीं मिली तो क्या इसे सोशल मीडिया के जरिए वायरल करने की रणनीति अपनाई गई?
पंजाब पुलिस की संभावित जांच में इन सभी पहलुओं की पड़ताल हो सकती है। डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया गतिविधियों और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
अकाली दल और सुखबीर बादल पर लगाए जा रहे आरोप
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस मामले में शिरोमणि अकाली दल और उसके नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि यह पूरा प्रकरण राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है। हालांकि अकाली दल की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं तो यह मामला और अधिक गंभीर हो सकता है तथा संबंधित पक्षों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं यदि आरोप साबित नहीं होते तो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो सकता है।
डीजीपी से होगी सख्त कार्रवाई की मांग
आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मुलाकात के दौरान दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करेगा। पार्टी का कहना है कि फर्जी सामग्री के जरिए मुख्यमंत्री, सरकार और पंजाब के माहौल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है, इसलिए इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
अब जांच पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जी वीडियो की शुरुआत कहां से हुई और इसके पीछे वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। डीजीपी कार्यालय में शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की तस्वीर साफ कर सकती है। तब तक पंजाब की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना रहने की संभावना है।
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