चंडीगढ़, 10 अगस्त (ध्रुव)। पंजाब में Private Schools द्वारा मनमानी फीस वसूली के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा ने ‘Punjab Regulation of Fees of Un-Aided Educational Institutions (Amendment) Bill, 2026’ को मौखिक मतों से सर्वसम्मति से पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य निजी स्कूलों की फीस वृद्धि और अलग-अलग मदों के नाम पर होने वाली अतिरिक्त वसूली पर नियंत्रण लगाना है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र में Private Schools अपनी फीस में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। इससे अधिक फीस बढ़ाने के लिए संबंधित रेगुलेटरी संस्था की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
सरकार के अनुसार अभिभावकों से किसी भी मद के तहत वसूली जाने वाली राशि को फीस का हिस्सा माना जाएगा। इसमें ट्यूशन फीस, ट्रांसपोर्टेशन फीस, बिल्डिंग फंड और अन्य शुल्क शामिल होंगे। इसका उद्देश्य स्कूलों द्वारा अलग-अलग मदों के जरिए फीस बढ़ाने के रास्ते बंद करना है।
Private Schools का होगा फोरेंसिक ऑडिट
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार निजी स्कूलों का फोरेंसिक ऑडिट करवाएगी। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि Private Schools ने पिछले वर्षों में अभिभावकों से कितनी अतिरिक्त फीस वसूली है।
भगवंत मान के मुताबिक जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे अतिरिक्त वसूली की जांच की जाएगी और पात्र मामलों में राशि अभिभावकों को वापस करवाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उल्लंघन पर जुर्माना, तीसरी बार मान्यता रद्द
नए प्रावधानों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर चरणबद्ध कार्रवाई होगी। पहली बार उल्लंघन पर 50 हजार, दूसरी बार 1 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार उल्लंघन होने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को व्यापार बनने नहीं देगी और राज्य में शिक्षा माफिया को पैर नहीं पसारने देगी। उनके मुताबिक निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि से सुरक्षा देना इस कानून का प्रमुख उद्देश्य है।
32 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
भगवंत मान ने बताया कि पंजाब के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए कानून से इन विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अनुचित वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी तथा निजी शिक्षण संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कोविड काल का जिक्र करते हुए पिछली कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल बंद होने और वाहन नहीं चलने के बावजूद अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस वसूली गई थी। उन्होंने कहा कि अब इस तरह की वसूली की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Private Schools : जिला स्तर पर फीस वृद्धि की निगरानी
सरकार के अनुसार डिप्टी कमिश्नर की अगुवाई वाली जिला रेगुलेटरी समिति Private Schools की फीस वृद्धि से जुड़े प्रस्तावों की जांच और नियमन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभिभावकों से वसूले जाने वाले प्रत्येक शुल्क को नियमन के दायरे में लाने का उद्देश्य फीस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा एक पवित्र और जनकल्याणकारी क्षेत्र है, इसे केवल मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार के शिक्षा सुधारों के परिणाम सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहे हैं और 2026 में पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने NEET परीक्षा पास की, जबकि 2021 में यह संख्या 80 थी।
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