पंजाब

Private School Fee Regulation : सरकार लाएगी देश का सख्त कानून

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Private School Fee Regulation Government to Introduce Strict National Law
Private School Fee Regulation Government to Introduce Strict National Law

पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगेगी रोक, 5% से अधिक बढ़ोतरी नहीं

चंडीगढ़, 3 जून (ध्रुव)। मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि अब पंजाब का कोई भी निजी स्कूल सालाना 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस संबंध में अध्यादेश और नया कानून (Private School Fee Regulation) लाने जा रही है, जिसे मुख्यमंत्री ने देश का सबसे सख्त स्कूल फीस नियमन कानून बताया है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।

सरकार के अनुसार फीस वृद्धि की 5 प्रतिशत सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य फंड, चार्ज और अन्य खर्च भी इसी सीमा के दायरे में आएंगे।

कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के कारण निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की खुली छूट मिल गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए अभिभावकों को आर्थिक राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Private School Fee Regulation : शिकायतों की होगी जांच

मुख्यमंत्री ने कहा कि Private School Fee Regulation के तहत फीस बढ़ोतरी से जुड़ी सभी लंबित शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी स्कूलों के फीस ढांचे की निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी वास्तविक खर्च या विकास कार्यों के आधार पर ही हो।

Private School Fee Regulation : उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी:

  • पहला उल्लंघन: जुर्माना
  • दूसरा उल्लंघन: अधिक जुर्माना
  • तीसरा उल्लंघन: स्कूल की मान्यता या एफिलिएशन रद्द

इसके अलावा रेगुलेटरी बॉडी अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करने का आदेश भी दे सकेगी।

स्कूलों के वित्तीय ऑडिट पर भी विचार

सरकार निजी स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विशेष समिति गठित करने पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित ऑडिट में निम्न बिंदुओं की जांच की जा सकती है:

  • फीस संग्रह
  • वेतन भुगतान
  • बुनियादी ढांचा निवेश
  • रिजर्व फंड
  • संबंधित पक्षों के लेन-देन
  • पिछले 3 से 5 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड

इस Private School Fee Regulation से यह तय करने में मदद मिलेगी कि फीस वृद्धि वास्तव में उचित थी या नहीं।

अभिभावकों को मिलेगा बड़ा लाभ

सरकार का मानना है कि नए कानून से लाखों परिवारों को राहत मिलेगी और शिक्षा के नाम पर होने वाली कथित लूट-खसोट पर रोक लगेगी। साथ ही फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

Private School Fee Regulation में मुख्य घोषणाएं

  • निजी स्कूल सालाना 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे
  • पिछले 3 वर्षों में अतिरिक्त वसूली की गई फीस लौटानी होगी
  • सभी अनिवार्य फंड और चार्ज 5% सीमा के दायरे में
  • लंबित शिकायतों की जांच होगी
  • बार-बार उल्लंघन पर मान्यता रद्द हो सकती है
  • वित्तीय ऑडिट व्यवस्था पर विचार
  • विधानसभा सत्र में नया कानून लाया जाएगा

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Rajesh Sachdeva

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